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भारत में मृदा अपरदन के भौतिक कारण


जब वायु जल की लहरें एवं अन्य कारण से मिलता नष्ट हो जाती है या अनुपयोगी हो जाती है तो इस स्थिति को हम लोग मृदा अपरदन कहते हैं मृदा अपरदन मिट्टी की सबसे ऊपरी परत को तय होना है सबसे ऊपरी परत को तय होने का अर्थ है समस्त व्यवहारिक प्रक्रिया है तो मिट्टी का बेकार हो जाना भारत के 338 क्षेत्र में लगभग समस्या से ग्रस्त है





देश की लगभग 8000 एकड़ भूमि प्रतिवर्ष बिगड़ रही है भारत की कृषि भूमि से 80000 भू में अब तक बेकार हो गई है और इससे भी बड़ा क्षेत्र प्रतिवर्ष निर्धारण के कारण कम उत्पादन होता जा रहा है मृदा अपरदन भारतीय कृषि के लिए एक राष्ट्रीय संकट बन गया है भारत के विभिन्न भागों में मृदा अपरदन के भिन्न-भिन्न कारण है इसे निम्न रूप से नष्ट किया जा सकता है भौतिक कारण





भू स्खलन अवनालिका अपरदन पवन अपरदन नदी और समुद्र तटीय भुज वर्षा की प्रकृति एवं वितरण संस्कृति के मानवीय कारण किसी की गलत पद्धति अपनाना वन का विनाश करना जनसंख्या में वृद्धि होना यह सब भौतिक कारण है जो भूमि अपरदन को बढ़ावा दे रहा है भारत में तीव्र गति से बढ़ती हुई जनसंख्या सबसे बड़ा भूमि अपरदन का कारण है जिसकी वजह से वनों की चटाई की जाती है और साथ में जनसंख्या बढ़ने के कारण भूमि अपरदन भी होता है भूमि अपरदन जनसंख्या वृद्धि के वजह से मृदा अपरदन इसलिए होता है क्योंकि जितने भी व्यक्ति है आवास के लिए वनों को काटते हैं