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सविनय अवज्ञा आंदोलन मैं बिहार के भूमिका

1930 दशक में आरंभ में साइमन आयोग नेहरू रिपोर्ट महान मंदिर एवं मेरठ षड्यंत्र वाला जैसी घटनाओं के कारण व्याप्त सामाजिक राजनीतिक तनाव का उपयोग पूर्ण स्वराज के पक्ष में राष्ट्रीय आंदोलन के संदर्भ में करने के लिए 6 अप्रैल 1930 को दांडी के समुद्र तट पर नमक बनाकर गांधी जी ने कांग्रेस के पूर्व निर्धारित राजनीति के अनुरूप सविनय अवज्ञा आंदोलन का आरंभ किया इसी के साथ देशभर में इसी आंदोलन का विस्तार हुआ इस आंदोलन के मुख्य कार्यक्रम थे नमक बनाकर कानून का भंग करना विदेशी वस्तुओं एवं नशीली वस्तुओं का बहिष्कार करना शराब दुकानों पर धरना तथा खादी एवं ग्राम उद्योग को बढ़ावा देना

बिहार में उपरोक्त कार्यक्रम के संचालन के लिए विभिन्न सामाजिक वर्गों का उल्लेख नीय भूमिका निभाई इस आंदोलन में कृषक वर्ग और महिलाओं की भागीदारी विशेषकर उल्लेखनीय रही बिहार के कई जिलों चंपारण सारण पटना मुंगेर इत्यादि के नमकीन मिट्टी से नमक बनाकर नमक का भंग किया गांधीजी के गिरफ्तारी के विरोध में हुए जल प्रदर्शन शराबबंदी और विदेशी वस्तुओं और अन्य वस्तुओं का बहिष्कार करना के लिए पुरुष के साथ महिला भी इस आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग ले शाहाबाद गाया मुंगेर सारण पटना मुजफ्फरपुर इत्यादि जिला के लाखों कृषक

ओने सविनय अवज्ञा आंदोलन में पहले के आंदोलन की अपेक्षा बहुत अधिक रहे श्रीमती हसन इमाम विंध्यवासिनी देवी कमल कामिनी देवी इत्यादि ने इस आंदोलन में उल्लेखनीय योगदान दिया यहां ना केवल उच्च वर्गीय महिलाओं ने बल्कि कृषि एवं अन्य ग्रामीण कृषि से संबंधित महिलाओं ने भी भारी संख्या में इस आंदोलन में भाग लिया

बिहार में सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान मुसलमानों की भागीदारी असहयोग आंदोलन खिलाफत आंदोलन की तुलना में कम रही फिर भी अनेक मुस्लिम राष्ट्रवादी हसन इमाम अब्दुल बारी अली इमाम इत्यादि का योगदान महत्वपूर्ण रहा हसन इमाम स्वदेशी संघ के महत्वपूर्ण सदस्य थे इस आंदोलन में औद्योगिक सरमीक वर्ग ने पहले कितना उत्साह नहीं दिखाया लेकिन छोटे और बड़े दोनों प्रकार के व्यापारियों ने

इस आंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभाई इस आंदोलन नेपाले की तरह ही पत्रकार अध्यापक सहित शिक्षित मध्यमवर्ग ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया छात्र एवं युवक ने बिहार के विभिन्न भागों में लगभग सभी कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भाग लेकर आंदोलन को अधिकाधिक प्रभावी बनाने का काम किया आंदोलन के क्रम में छपरा जिले के कैदियों द्वारा स्वदेशी वस्तुओं को समर्थन में की गई नंगी हड़ताल भी उल्लेखनीय है इस प्रकार सविनय अवज्ञा आंदोलन को अधिकाधिक प्रभावी एवं जुझारू बनाने के लिए बिहार के विभिन्न सामाजिक वर्गों का महत्वपूर्ण एवं निर्णायक भागीदारी निवाई