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संथाल विद्रोह के बारे में विस्तार से

संथाल विद्रोह संथाल विद्रोह की सबसे जबरदस्त विद्रोह था इस बात में यकीन करते थे भागलपुर में राज महल के बीच का चित्र दमन ए कोह को कहलाता था जमींदार पुली राजस्व विभाग और अदालतों ने संथाल का जिलों में दायर किया एवं उनकी जमीन जायदाद छीन लिया संस्थानों का कर्ज देकर 50 से 500 परसेंट ब्याज वसूला जाता था धन्यवाद लोग संथाल को मार देते थे उनके खड़ी फसल पर हाथ के द्वारा दिए जाते थे जून 18 55 को हनी आदिवासी गांव की आबादी ने विद्रोह का निर्णय लिया दो प्रमुख नेता सिदो और कानू ने घोषणा की कि ठकुरानी ने उन्हें निर्देश दिए था कि आजादी के लिए हथियार उठा लो

सिदो ने कहा


ठाकुर जी ने मुझे आदेश देते समय कहां है कि यादवों का नहीं है ठाकुर जी बहुत हमारी तरफ से लड़ेंगे इस तरह आप सब लोग और सिपाही लोग खुद ठाकुर जी से लड़ेंगे 60000 हथियारबंद संभालो को इकट्ठा किया एवं कई हजार आदिवासी को तैयार रहने का कहा क्या उनसे कहा गया कि भंडारा बजे हो तो हथियार उठा लो विद्रोहियों का सफाया करने एक मेजर ने नेतृत्व में 10 टुकड़ों में भेजी गई मार्शल लॉ लागू किए गए विद्रोही नेताओं पर 10000 का इनाम घोषित किया गया 15,000 से ज्यादा संथाल मारे गए अगर 1855 में सिदो पकड़ा गया