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बिहार में चुनाव प्रक्रिया पर टिप्पणी


चुनावी प्रक्रिया स्वस्थ लोकतंत्र का आधार है इसके द्वारा लोक समय-समय पर स्वयं प्रशासन के लिए अपने प्रतिनिधियों का चयन करते हैं भारत एक लोकतांत्रिक देश है और बिहार अभिन्न अंग है अतः समय समय पर अन्य राज्यों की तरह यहां भी संवैधानिक प्रावधान के अनुरूप चुनावी प्रक्रिया संपन्न होती है





संविधान के अनुच्छेद 324 के अनुसार निर्वाचन आयोग की संपूर्ण प्रक्रिया का संचालन एवं नियंत्रण एवं प्रवचन करता है स्वतंत्र और निष्पक्ष शांतिपूर्ण चुनाव को सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेवारी निर्वाचन आयोग की होती है संपूर्ण चुनावी प्रक्रिया के कई चरणों में होते हैं इसमें राजनीतिक दलों द्वारा उम्मीदवारों का चयन नामांकन चुनाव प्रचार मतदान मतगणना तथा परिणामों की घोषणा इत्यादि करवाया संपन्न होती है





निर्वाचन आयोग राज्य सरकार की सहमति से चुनाव कार्यक्रम निर्धारित करता है सामान्यता निर्वाचन आयोग चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करता है किंतु वास्तविक रूप से इसकी शुरुआत राष्ट्रपति राज्यपाल की अधिसूचना से होती है नामांकन पत्र दाखिल करने के लिए उम्मीदवारों का नियत समय दिया जाता है नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद निर्वाचन अधिकारी द्वारा नामांकन पत्र की जांच कर फिर घोषित उम्मीदवारों की सूची जारी की जाती है उम्मीदवारों को अपना नाम वापस लेने का भी समय दिया जाता है निर्वाचन अधिकारी द्वारा उम्मीदवारों की अंतिम सूची जारी होने से पाद विभिन्न राजनीतिक दलों तथा स्वतंत्र उम्मीदवारों को चुनाव चिन्ह प्रदान किया जाता है सुरक्षित चुनाव चिन्ह मान्यता प्राप्त दलों को तथा स्वतंत्र चुनाव चिन्ह वालों को दिया जाता है नामांकन पत्र वापसी के दिन कम से कम 20 दिन चुनाव प्रचार के लिए दिए जाते हैं समय चुनाव प्रचार को मतदान के 48 घंटे पहले बंद कर दिया जाता है





निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव आचार संहिता जारी की जाती है जिसका पालन करना अनिवार्य है यद्यपि इसका अवहेलना होती रहती है चुनाव के दिन मतदान का कार्य संपन्न होता है फिर मत बेटियों को मुहर बंद करके मतगणना केंद्रों तक पहुंचाया दिया जाता है मतगणना के समय सभी प्रत्याशी या उनके प्रतिनिधि उपस्थित रहते हैं जो प्रत्याशी दिए गए सभी मतों का साधारण बहुमत प्राप्त कर लेता है उसे निर्वाचित घोषित कर दिया जाता है यद्यपि स्वतंत्र लोकतंत्र के लिए निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण चुनाव प्रक्रिया नितांत जरूरी है





किंतु राजनीतिज्ञ द्वारा अपराधियों एवं अवसर साहू के गठबंधन के स्वार्थ के कारण बिहार में चुनाव की प्रक्रिया कई बिटिया आ गई है बाहुबली उम्मीदवार अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए धनबल बाहुबल का सहारा लेते हैं जाति संप्रदाय एवं धर्म के आधार पर वोट मांगे जाते हैं प्रत्याशी एक दूसरे को चरित्र हरण करने से भी नहीं परहेज करते हैं शिक्षा जागरूकता की कमी के कारण मतदाता भी या तो मतदान के रूचि नहीं लेते हैं या जाति धर्म के आधार पर ही मतदान कर देते हैं फर्जी मतदान भूत पर कब्जा की भी घटनाएं होती है मतदाता देश में रहते हैं और मतदान केंद्र पर नहीं पहुंच पाते हैं राजनेता अपनी मनपसंद अधिकारियों को प्रशासन में लगाते हैं और अपनी जीत को सुनिश्चित करने का प्रयास में लगे रहते हैं पिछले विधानसभा चुनाव में प्रवेश जी राव की विशेष एवं चुनाव आयोग किस तरीके से काफी हद तक पारदर्शी एवं निष्पक्ष तरीके से चुनाव संपन्न हुआ