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प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत के आधार पर हिमालय की उत्पत्ति


हिमालय पर्वत की व्याख्या प्लेट टेक्टोनिक सिद्धांत के आधार पर वैज्ञानिक ढंग से की जाती है वर्तमान से लगभग 70 मिलियन वर्ष पूर्व हिमालय के स्थान पर टेथिस सागर का अस्तित्व था यूरेशियन प्लेट एवं भारतीय प्लेट के अभिसरण से 33 सागर के अवसादो कावलन हुआ जिनसे हिमालय की उत्पत्ति हुई करोड़ों वर्ष पूर्व भारतीय प्लेट यूरेशियन प्लेट की ओर बढ़ने लगा 2 से 3 करोड़ों वर्ष पूर्व थी





सागर के अवसादो केवल से हिमालय की श्रृंखला उभरने लगी एवं वर्तमान में तीनों श्रृंखलाएं का विकास एक करोड़ वर्ष पूर्व तक हो चुका था हिमालय निर्माण का कार्य क्रांतिक अवस्थाओं में संपन्न हुआ सर्वप्रथम पुत्री भाग में महा हिमालय बना तत्पश्चात इसी के समानांतर दक्षिण भाग में लघु हिमालय गाना इसके बाद महान हिमालय कथा लघु हिमालय से निकलने वाली नदियां ने इनकी दक्षिणी भाग में मलबा को जमा करना शुरू कर दिया काल के अंतर में दबाव बढ़ने से उत्पन्न क्षैतिज बल के कारण शिवालिक श्रेणी का निर्माण हुआ









यह उल्लेखनीय है कि हिमालय के निर्माण की प्रक्रिया निरंतर यानी आज भी जारी है हिमालय के क्षेत्र में आने वाले भूकंप नदियों के मार्ग से होने वाले परिवर्तन एवं पीर पंजाल क्षेत्र में पाए जाने वाले जीव निक्षेप इत्यादि हिमालय के अधिष्ठान होते हुए नजर आते हैं भूगर्भिक काल के अनुसार हिमालय के विभिन्न श्रेणियों का उत्थान की आयु का विवरण इस प्रकार दिया जा सकता है हिमालय की उत्पत्ति तृतीयक काल के विभिन्न कालों से हुई हैं इयोसीन एवम ोलोगोसिन कोचीन काल में बृहत हिमालय का मायोसीन निकाल में लघु हिमालय का प्राचीन काल में शिवालिक पर्वत का निर्माण हुआ है हिमालय उत्थान की प्रक्रिया अभी जारी है और माना जा रहा है कि उत्तर में क्रमिक रूप से एक नई पर्वत श्रेणी का निर्माण हो सकता है जिस में करोड़ों वर्ष लग सकते हैं