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बंगाल विभाजन ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम की दिशा को किस प्रकार प्रभावित किया


ब्रिटिश सरकार के अनुसार पांच में बंगाल का विभाजन प्रशासनिक सुविधा की दृष्टि से किया गया मगर बंगाल विभाजन भांग मूलभूत उद्देश्य बंगाल में विकसित एवं सशक्त हो रहे राष्ट्रीय आंदोलन को कमजोर करना तथा संप्रदायवाद को प्रोत्साहन देना था बंगाल विभाजन के विरुद्ध तीव्र प्रतिक्रिया हुई जिसने स्वतंत्रता संग्राम की दिशा और दशा को प्रभावित किया





भारतीय राष्ट्रवादी ओं ने भंग भंग को एक प्रशासनिक कार्रवाई ना मानकर भारतीय राष्ट्रवाद के लिए चुनौती माना 7 अगस्त 19 या 5 को बंग भंग विरोधी आंदोलन आराम हो गया धरना प्रदर्शन तथा जन्म समय बड़े पैमाने पर आयोजित किए गए शीघ्र ही इस आंदोलन का विस्तार पूरे देश के कई भागों में हो गया महाराष्ट्र गुजरात बंगाल पंजाब दक्षिण भारत दिल्ली मुल्तान इस आंदोलन का मुख्य केंद्र थे इस प्रकार इस आंदोलन में अखिल भारतीय स्वरूप एवं राष्ट्रीय स्वरूप ग्रहण कर लिया और स्वतंत्रता संग्राम के दायरे का विस्तार हो गया





इस आंदोलन की मुख्य रणनीति के अंतर्गत स्वदेशी एवं बहिष्कार पर बल दिया गया स्वदेशी आत्म शक्ति एवं आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित किया वहीं बहिष्कार ने ब्रिटिश शासन की नींव को कमजोर किया आगे स्वदेशी एवं बहिष्कार स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख पात्र बन गए इस आंदोलन में स्वतंत्रता संग्राम के सामाजिक आधार को भी विस्तृत किया यह पहला अवसर था





जब महिलाओं छात्रों मजदूरों किसानों सहित जन संधारण आंदोलन ने खुलकर और सक्रिय रूप से भाग लिया इस आंदोलन में मुसलमानों की भागीदारी अपेक्षाकृत कम रहे लेकिन अब्दुल रसूल लियाकत हुसैन जैसे लोकप्रिय मुस्लिम नेताओं कि आंदोलन में सक्रियता से भविष्य में राष्ट्रीय आंदोलन में मुस्लिमों का भागीदारी की संभावनाओं को सुनिश्चित किया





इस आंदोलन के दौरान विकसित जुझारू मानसिकता एवं बाद में उग्र आंदोलन की दिशा हीनता ने आतंकवादी विचारधारा को प्रोत्साहित किया इसी दौरान कई आतंकवादी संगठन अस्तित्व में आए मुजफ्फरपुर बम कांड आतंकवादी रणनीति की ही परिणति थी इस आंदोलन ने सांस्कृतिक गतिविधियों स्वदेशी शिक्षण संस्थान तथा स्वदेशी उद्योग स्थापना को प्रोत्साहित किया





इस आंदोलन का एक निराशाजनक पक्ष यह रहा कि इस के दौरान उग्रवादियों द्वारा अपनाए गए कार्यक्रम एवं ब्रिटिश सरकार की नीतियां के कारण संप्रदायवाद का विकास हुआ भविष्य में स्वतंत्रता संग्राम को कमजोर करने के लिए अंग्रेजों ने संप्रदाय वाद का इस्तेमाल किया भारत विभाजन के रूप में सामने आई