Header Ads

भारत छोड़ो आंदोलन में बिहार में आजाद दस्ता की क्या भूमिका


भारत छोड़ो आंदोलन को ब्रिटिश सरकार ने हर संभव बलपूर्वक दबाने का प्रयास किया परिणाम स्वरूप क्रांतिकारी को गुप्त रूप से आंदोलन चलाने का बाध्य होना पड़ा इसी क्रम में जयप्रकाश नारायण द्वारा क्रांतिकारी युवक को गुरिल्ला युद्ध में प्रशिक्षित करने हेतु नेपाल में आजाद दाता नामक एक स्वयंसेवक संघ का गठन किया गया नेपाल में ही आजाD भारत छोड़ो आंदोलन को ब्रिटिश सरकार ने हर संभव बलपूर्वक दबाने का प्रयास किया परिणाद दाता का अखिल भारतीय केंद्र तथा उससे कुछ ही दूरी पर




बिहार प्रांतीय कार्यालय बनाया गया वहीं की एक पहाड़ी पर रेडियो स्टेशन बनाया गया तथा इस स्वयंसेवक हेतु रेडियो से प्रचार-प्रसार किए जाने की व्यवस्था की गई स्त्रियों के संचालन द्वारा दायित्व राम मनोहर लोहिया परसों की गई थी बिहार प्रदेश के लिए इससे संबंधित एक परिषद का गठन किया गया इसके संयोजक सूरज नारायण सिंह को बनाया गया मार्च-अप्रैल 1943 में नेपाल के राम विलास के जंगल में आजाद दाता का पहला प्रारंभ हुआ बिहार के युवक को अग्नि चक्र चलाने का प्रशिक्षण दी गई इस प्रशिक्षण शिविर आनंद सिंह को बनाया गया था जो ब्रिटिश सेना के त्यागपत्र देने के पश्चात यहां आए थे




भागलपुर के सियाराम सिंह जयप्रकाश नारायण की प्रेरणा से भागलपुर में एक आजाद डरते का गठन किया गया जो सिया राम दल के नाम से जाना जाता था इसके लिए उन्होंने जो योजना तैयार की उसमें प्रमुख था धन संग्रह करना अधिकाधिक अग्नि शास्त्रों का संग्रहण करना तथा ब्रिटिश सरकार के खिलाफ लोगों को संगठित करना




नेपाल में आजाद देगा जो प्रशिक्षण शिविर गठित किया गया था वह लगातार चलता रहा इसी दौरान जय प्रकाश नारायण सहित आंदोलनकारियों को गिरफ्तार हनुमान नगर स्थित जेल में डाल दिया गया जयप्रकाश नारायण की गिरफ्तारी की खबर जो है शिविर में पहुंचे शिविर में उपस्थित कार्यकर्ता उस जेल की तरफ से उद्देश्य आगे बढ़ने लगे ताकि जेल तोड़कर गिरफ्तार नेताओं को ही दिया कर दिया जा सका अंत में अपने प्रयास में सफल रहे तथा जयप्रकाश लोहिया सहित लगभग सभी नेताओं को मुक्त करा लिया इधर महेंद्र को पकड़े गए तथा इन्हें फांसी पर लटका दिया गया




जयप्रकाश हनुमान नगर से रिहा होने के पश्चात कोलकाता लौटते तथा गिरफ्तारी के भय से भूमिगत हो कर उन्होंने सिंगापुर स्थित सुभाष के आजाद हिंद सरकार के संपर्क स्थापित करने की बहुत कोशिश की परंतु इसमें वे असफल रहे सितंबर 1943 अमृतसर में चे प्रकार लाहौर जेल में डाल दिया गया इसके बाद उन्हें आगरा जेल में स्थानांतरित कर दिया गया जहां से अप्रैल में 1943 मे लोहिया के साथ हुए इस प्रकार आजाद दाता अनेक हिंसात्मक कार्रवाई की इसके अंतर्गत आते के सदस्यों द्वारा सहारन एवं मुजफ्फरपुर के पुलिस थानों को जलाया गया तथा गया मुजफ्फरपुर की जगह संचार व्यवस्था की पूरी तरह ठप कर दी गई




कहा जा सकता है कि भारत छोड़ो आंदोलन में आजाद दास्ताने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई इससे रास्ते की गतिविधियों से जनता में क्रांति की भावना को बरकरार रखें भारत छोड़ो आंदोलन में जिस के कारण अंग्रेजी राज को सत्ता हस्तांतरण के लिए विवश होना पड़ा आजाद दस्ता एवं जुझारू बनाने में आजाद दाता का योगदान निर्णायक रहा